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Dead Ball New Rules 2026: क्रिकेट में कब मानी जाएगी गेंद ‘डेड’? जानें ICC का नया कानून और इसका गेम पर असर

इंदौर, मार्च 2026: क्रिकेट के खेल को और भी ज्यादा रोमांचक बनाने के लिए समय-समय पर इसके नियमों में बदलाव होते रहते हैं। लेकिन इस साल 2026 में आईसीसी (ICC) द्वारा ‘डेड बॉल’ (Dead Ball) के नियमों में किया गया बदलाव सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अक्सर क्रिकेट के मैदान पर हमने देखा है कि गेंद के ‘डेड’ होने या न होने को लेकर खिलाड़ियों और अंपायरों के बीच तीखी बहस हो जाती है। अब इन विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए आईसीसी ने अब नया कानून लागू कर दिया गया है।

क्या है ICC के द्वारा Settled Ball का नया प्रावधान?

पुराने क्रिकेट नियमों के अनुसार, गेंद को तब तक ‘डेड’ नहीं माना जाता था जब तक कि वह पूरी तरह से गेंदबाज या विकेटकीपर के दस्तानों में न आ जाए। इस देरी का फायदा उठाकर कई बार बल्लेबाज चालाकी से अतिरिक्त रन भाग लेते थे, भले ही फील्डर ने गेंद को पकड़ लिया हो।

पहले के नियमों में ‘डेड बॉल’ होने की प्रक्रिया पूरी तरह Mechanical होती थी यानी जब तक गेंद कीपर के पास नहीं पहुँचती, उसे डेड‌ बॉल माना जाता था। लेकिन अब आईसीसी ने अंपायर को यह Power दी है कि वह अपनी समझ और मैच की परिस्थिति के हिसाब से फैसला ले सकते हैं।

अगर किसी फील्डर ने गेंद पकड़ ली है और वह उसे वापस फेंकने की पोजीशन में नहीं है, बल्कि खेल वहीं रुक गया है, तो अंपायर अपने ‘विवेक’ से उसे तुरंत डेड घोषित कर देगा। यहाँ अंपायर का फैसला अंतिम होगा और बल्लेबाज यह दलील नहीं दे पाएगा कि गेंद अभी कीपर तक नहीं पहुँची थी।

अक्सर हमने कई क्रिकेट मैच में देखा है कि फील्डर जब दोड़कर गेंद पकड़ते है तो फील्डर थोड़ा ढीला पड़ जाता है या थ्रो फेंकने में देरी कर देता है। इसी बीच चतुर बल्लेबाज इस ‘सुस्ती’ का फायदा उठाकर दूसरा या तीसरा रन आसानी से चुरा लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अगर बल्लेबाज ने फील्डर के हाथ में गेंद होने के बावजूद रन दौड़ना शुरू किया, और अंपायर ने उसे ‘डेड’ मान लिया है, तो वह रन मान्य नहीं होगा।

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क्रीज के बाहर ‘अनफेयर’ मूवमेंट के बाद डेड बॉल कैसे हो सकती हैं?

इस बार आईसीसी ने खेल भावना को बनाए रखने के लिए क्रिकेट में एक और नया नियम शामिल किया गया है। अक्सर हमने देखा है कि जब गेंदबाज अपनी डिलीवरी गेंद फेंकने की स्थिति में होता है, तो फील्डिंग टीम का कोई खिलाड़ी जानबूझकर अपनी जगह बदलता है ताकि बल्लेबाज का ध्यान भटकाया जा सके।

2026 के नए नियमों के अनुसार, यदि गेंदबाज के गेंद फेंकने से पहले फील्डर कोई भी ‘अनफेयर’ मूवमेंट करता है, तो अंपायर न केवल उस गेंद को ‘डेड’ घोषित करेगा, बल्कि बल्लेबाजी करने वाली टीम को 5 रन की पेनल्टी लगा सकता है। यह नियम खेल में अनुशासन लाने और बल्लेबाजों की एकाग्रता की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

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बल्लेबाज के हेलमेट का रहस्यमय नियम क्या है?

एक और नियम जिसे लेकर अक्सर इंदौर के होलकर स्टेडियम जैसे छोटे मैदानों पर चर्चा होती है, वह है कि बल्लेबाज के हेलमेट से टकराने वाली गेंद। अगर मैदान से बाहर चली जाती है तो वह बॉल डेड नहीं मानी जायेगी क्या इस आईसीसी के नए नियम क्या कहते हैं इस तरह की बॉल भी स्पष्ट किया गया है। यदि गेंद बल्लेबाज के बल्ले से नहीं, बल्कि सीधे उसके हेलमेट या बॉडी प्रोटेक्टर से टकराती है और उसके बाद मैदान से बाहर चली जाती है, तो उस पर कोई रन (Leg Bye) नहीं दिया जाएगा।

उसे डेड बॉल माना जा सकता है यदि अंपायर को लगता है कि गेंद पर किसी का नियंत्रण नहीं था। साथ ही, हेलमेट से टकराकर अगर गेंद किसी फील्डर द्वारा पकड़ी जाती है, तो बल्लेबाज को ‘कैच आउट’ नहीं दिया जाएगा क्योंकि हेलमेट से टकराते ही गेंद का खेल तकनीकी रूप से समाप्त (Dead) माना जाता है।

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स्पाइडर कैम और अन्य बाहरी बाधाएं से बचाव?

​आजकल मैदान पर स्पाइडर कैम खिलाड़ियों के इतना करीब होता है कि कई बार बल्लेबाज ऊंचे शॉट खेलते हैं तो सीधे कैमरों या उनके सपोर्टिंग तारों (Wires) से जा टकराते हैं। आईसीसी के नियमों के अनुसार, जैसे ही गेंद हवा में किसी बाहरी उपकरण या पक्षी से टकराती है, इस तरह की बॉल को तुरंत ‘डेड बॉल’ घोषित कर दिया जाता है क्योंकि टकराने के बाद गेंद की दिशा और गति दौनो बदल जाती है।

इस स्थिति में सबसे ज़्यादा नुकसान उस बल्लेबाज का होता है जिसने शायद एक शानदार छक्का जड़ा हो, लेकिन तार से टकराने के कारण वह रन शून्य मान लिया जाता है। दूसरी ओर, गेंदबाज को भी वही प्रक्रिया फिर से दोहरानी पड़ती है। यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि मैच का परिणाम केवल खिलाड़ियों के कौशल पर आधारित हो, न कि मैदान पर मौजूद किसी तकनीकी बाधा पर।

निष्कर्ष

इंदौर की 56 दुकान और सराफा की गपशप में अब सिर्फ पुराने रिकॉर्ड्स की बातें नहीं होतीं, बल्कि असली चर्चा इन तकनीकी नियमों पर होती है। जब आप होलकर की स्टैंड्स में बैठकर जोश में चिल्लाते हैं “अरे भाग-भाग रन है!” तब आपको यह अहसास होना चाहिए कि पर्दे के पीछे अंपायर का ‘विवेक’ और ये नए नियम काम कर रहे होते हैं।

अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले ये ‘डेड बॉल’ नियम ही अब यह तय करेंगे कि आपके द्वारा चिल्लाया गया वह रन टीम के खाते में जुड़ेगा या फिर अंपायर के एक इशारे से वह शून्य हो जाएगा। क्रिकेट अब सिर्फ चौकों-छक्कों का नहीं, बल्कि इन बारीकियों का भी खेल बन गया है।

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Verified Analyst
Akash Pachore

Akash Pachore

Founder & Lead Cricket Analyst | Stump Ki Baat

आकाश पाचोरे **Stump Ki Baat** के संस्थापक और एक अनुभवी क्रिकेट विश्लेषक हैं। वे आंकड़ों और मैच की रणनीतियों को गहराई से समझाने के लिए जाने जाते हैं। उनका लक्ष्य क्रिकेट प्रशंसकों तक सबसे सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है।

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