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0वीं गेंद पर विकेट: विराट कोहली का अनोखा रिकॉर्ड, जानिए नियम और पूरा सच जानिए Experts कि राय 2026

0वीं गेंद पर विकेट: विराट कोहली का अनोखा रिकॉर्ड, जानिए नियम और पूरा सच जानिए Experts कि राय 2026 क्या क्रिकेट में ऐसा भी होता है की कोई भी बॉलर बिना बोल फेंके किसी भी बेस्टमैन को आउट कर दे और बॉल भी 0 रहै, हम बात कर रहे हैं क्रिकेट का वह पल जो स्कोरबोर्ड पर तो विकेट जुड़ गया, लेकिन गेंदों की गिनती अभी भी 0 थी।

यही वह पल था जब क्रिकेट इतिहास में विराट कोहली के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हुआ। जो अभी तक कोई भी बल्लेबाज एक रिकॉर्ड की बराबरी नहीं कर पाया है ऐसे तो क्रिकेट की दुनिया में अक्सर रिकॉर्ड शतक, दोहरे शतक या हैट्रिक से बनते रहते हैं।

पहली बार में यह सुनने में आपको अजीब सा लग सकता है, कि कोई बिना गेंद डाले विकेट कैसे मिल सकता है? अगर आप क्रिकेट के नियमों की गहराई में जाएँ तो पता चलता है कि यह सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि जागरूकता और सही नियमों की समझ का नतीजा था।

Table of Contents

31 अगस्त 2011: जब मैनचेस्टर में बना इतिहास?

2011 में इंग्लैंड दौरे के दौरान 31 अगस्त को मैनचेस्टर में भारत और इंग्लैंड के बीच इकलौता टी20 मैच खेला गया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत टीम 19.4 ओवर में 165 रन पर ऑलआउट हो गयी थी। इस मैच में Ajinkya Rahane ने 61 रन बनाए, जबकि Suresh Raina (33) और Rahul Dravid (31) ने अहम योगदान दिया।

0वीं गेंद पर विकेट

Virat Kohli भी सिर्फ 4 रन बनाकर आउट हुए। दूसरी ओर लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 7 ओवर में 60 रन बना लिए थे। उस समय Kevin Pietersen 33 रन पर खेल रहे थे और Eoin Morgan उनका साथ दे रहे थे। इसी मुकाबले में “0वीं गेंद पर विकेट” की वह अनोखी घटना घटी।

नियम क्या कहते हैं और इसपर विवाद क्यों होता है?

अगर हम क्रिकेट के आधिकारिक ICC नियमों के अनुसार बात करें तो हमें यह पर पता चलता है कि, यदि कोई भी गेंदबाज गेंद फेंकने से पहले नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज क्रीज छोड़ देता है, तो गेंदबाज उसे रन-आउट कर सकता है। इस स्थिति में कोई बल्लेबाज आउट होता है तो वह वैद्य रूप से आउट ही रहेगा, और गेंद भी गिनी नहीं जायेगीं। यही वजह है कि इसी को ही “0वीं गेंद पर विकेट” कहा जाता है।

पहले इसे “मंकड़िंग” के नाम से भी जाना जाता था, जो यह नाम भारतीय खिलाड़ी Vinoo Mankad से जुड़ा है। लेकिन समय के साथ यह शब्द विवाद का कारण बन गया। कुछ लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया, जबकि नियम हमेशा से इसे वैध मानते रहे।

हाल के वर्षों में International Cricket Council (ICC) ने नियमों को स्पष्ट करते कहा कि यह पूरी तरह सामान्य रन-आउट की श्रेणी में आता है।‌ यानी अब यह पूरी तरह नियमसम्मत है और किसी विशेष टैग की जरूरत नहीं।

क्रिकेट एक्सपर्ट की राय: इसे चालाकी कहना गलत, यह नियमों की सटीक समझ है

क्रिकेट नियमों के जानकार और पूर्व भारतीय स्पिनर Ravichandran Ashwin ने कई मौकों पर साफ कहा है कि नॉन-स्ट्राइकर पर कोई भी बल्लेबाज रन-आउट होता है तो यह पूरी तरह वैध है और इसे गलत ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, “अगर बल्लेबाज बार बार क्रीज छोड़ रहा है तो वह जोखिम खुद ले रहा है। हर गेंदबाज को नियमों के भीतर रहकर इसका फायदा उठाने का पूरा अधिकार है।”

अश्विन का कहना यह है कि क्रिकेट अब भावनाओं से ज्यादा प्रोफेशनल अप्रोच का खेलना चाहिए। जब कोई भी बल्लेबाज पावरप्ले में बैटिंग करता है उसको भी पावर प्ले का फायदा जरूर उठाना चाहिए, क्योंकि पावरप्ले में अधिकतर फील्डर बाउंड्री सर्केकल अंदर ही रहत है और गेंदबाज भी नियमों के दायरे में रहकर रणनीति बना सकता है। इसे खेल भावना के खिलाफ बताना सही नहीं, क्योंकि ऐसे नियम पहले से ही स्पष्ट हैं।

क्रिकेट के बड़े-बड़े विश्लेषकों का भी मानना है कि आधुनिक दौर में क्रिकेट मैच बहुत तेज़ रफ्तार से बदल रहा हैं। ऐसे में क्रिकेट के अंदर छोटी-छोटी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। “0वीं गेंद पर विकेट” इसी जागरूकता और मानसिक तैयारी का उदाहरण कहना चाहिए। इससे हमें यह पता चलता है कि खिलाड़ी सिर्फ शारीरिक कौशल पर नहीं, बल्कि नियमों की गहराई पर भी ध्यान दे रहे हैं।

कुछ पूर्व दिग्गजों ने हालांकि यह भी सुझाव दिया है कि अगर गेंदबाज पहले बल्लेबाज को चेतावनी दे दे तो बेहतर रहेगा। लेकिन ICC नियमों के मुताबिक किसी भी बल्लेबाज को चेतावनी देना अनिवार्य नहीं है। यही कारण है कि ICC ने इसे सामान्य रन-आउट की श्रेणी में रखा है, ताकि कोई भी क्रिकेटर एक्पर्ट, क्रिकेट विशषज्ञ भ्रम की स्थिति में न रहे।

अगर हम क्रिकेट को इस नजरिए से देखें तो विराट कोहली के नाम रिकॉर्ड दर्ज है यह कोई दिलचस्प फैक्ट नहीं, बल्कि बदलते क्रिकेट की सोच का प्रतीक भी है। और यही दर्शाता है कि आधुनिक खिलाड़ी नियमों को पूरी तरह समझते हैं और किसी भी मौके का फायदा उठाने में हिचकिचाते नहीं।

विराट कोहली का मामला सिर्फ रिकॉर्ड का नहीं था?

जब कोहली के नाम यह विकेट दर्ज हुआ, तब यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था। यह उस मानसिक सतर्कता का उदाहरण था, जो कि एक बड़े खिलाड़ीयों में अक्सर होती है।

0वीं गेंद पर विकेट

मैदान पर हर छोटी-से-छोटी हरकत पर नजर रखते हैं, कि बल्लेबाज मैदान पर क्या कर रहा है या फिर क्या सोच रहा है, ऐसे मौके अक्सर बहुत कम मिलते हैं इसलिए सही समय पर फैसला लेना यह सब अनुभव और क्रिकेटिंग दिमाग का हिस्सा है।

विराट कोहली को अक्सर आक्रामक बल्लेबाज के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने यह भी दिखाया कि वे नियमों की कितनी बारीकी से समझ रखते हैं।

और यही कारण है कि विराट कोहली को आधुनिक क्रिकेट मे सबसे खास बनाता है। खेल के मैदान मै अब सिर्फ ताकत या टाइमिंग का नहीं रहा, बल्कि दिमाग और सही रणनीति का भी हो चुका है।

मैच का टर्निंग पॉइंट और प्लेयर्स की मानसिक चुनौती?

किसी भी टीम में अचानक ऐसे विकेट गिर जाता है तो उस टीम के खिलाड़ी मैच के अंदर हमेशा मानसिक दबाव महसूस करते हैं और यह दबाव सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहता।

जब कोई बल्लेबाज इस तरह आउट होता है, तो पूरी टीम पर उसका असर पड़ता है। दूसरे बल्लेबाज भी ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, जहां पर दो रन होते हैं वहां पर एक ही रन से काम चलाना पड़ता है ज्यादा रन लेने में हिचकिचाते हैं और बल्लेबाज की लय भी टूट जाती है।

कई बार यह छोटा सा पल भी मैच का टर्निंग पॉइंट बन जाता है। जब भी विरोधी टीम को अचानक झटका लगता है तो गेंदबाजी टीम के अंदर और आत्मविश्वास बढ़ जाता है। इसलिए 0वीं गेंद पर मिला विकेट सिर्फ नियमों का मामला नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त का भी प्रतीक है।

खेल की भावना बनाम स्मार्ट क्रिकेट का नजरिया क्या है?

इस तरह के रन-आउट पर बहस अक्सर होती रहती है, और आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ पूर्व खिलाड़ी इसे बल्लेबाज को चेतावनी देकर करने की बात करते हैं, जबकि नए दौर के क्रिकेटर इसे पूरी तरह वैध मानते हैं।

दरअसल, आज का क्रिकेट पहले से ज्यादा बदल चुका है। हर टीम के मैनेजमेंट, सपोर्टकोच, मैच के दौरान वीडियो एनालिसिस करती है, हर छोटी-छोटी गलतियों पर नजर रखती है और नियमों का पूरा फायदा उठाती है। ऐसे में अगर कोई बल्लेबाज क्रीज से बाहर निकल जाता है, आप उसे रन आउट कर सकते हो।

इतिहास से हमें क्या सीखना चाहिए?

क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब नियमों की सही समझ ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। आज भी याद है 1940 के दशक में विनू मांकड़ की वह घटना से शुरू हुई बहस आज भी चर्चा में रहती है। लेकिन समय के साथ खेल बदल चुका है।

ICC द्वारा इस नियमों को साफ तौर पर परिभाषित करने के बाद अब यह स्पष्ट है कि यह पूरी तरह वैध आउट है। इसलिए इस विकेट को भावना की बजाय ICC द्वारा बनाए गए नियम और जिम्मेदारी के नजरिए से देखना सही होगा।

क्यों खास है विराट कोहली का यह रिकॉर्ड?

विराट कोहली के करियर में ऐसी तो सैकड़ों यादगार पारियां हैं, लेकिन यह रिकॉर्ड उन सबसे अलग और खास है। क्रिकेट में यह दिखाता है कि क्रिकेट सिर्फ बल्ले और गेंद से नहीं जीते जाते हैं, बल्कि जागरूकता, अनुशासन और सही नियमों की समझ भी खेल का एक अहम हिस्सा होता है।

0वीं गेंद पर विकेट” सुनने में भले अजीब लगता हो, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि जब भी आप खेल के मैदान पर उतरते हैं तो खेल को हमेशा जागरूकता के साथ खेलना चाहिए खेल मे हर पल मायने रखता है। एक छोटी सी चूक भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती है और एक सतर्क खिलाड़ी हमेशा मैदान में जागरूकता के साथ खेलता है।

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0वीं गेंद पर विकेट: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. 0वीं गेंद पर विकेट का मतलब क्या है?

जब गेंदबाज गेंद फेंकने से पहले नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज क्रिज से बाहर निकल जाता है और रन-आउट कर हो जाता है, तो गेंदबाज के नाम विकेट दर्ज होता है लेकिन गेंद नहीं गिनी जाती।

2. क्या मंकड़िंग नियम के खिलाफ है?

नहीं। International Cricket Council के अनुसार यह पूरी तरह वैध रन-आउट है।

3. विराट कोहली का यह रिकॉर्ड कब बना?

यह घटना उस मैच में हुई जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर टी20 में पहली बार गेंदबाजी करते हुए Virat Kohli की वाइड गेंद पर क्रीज से बाहर निकले Kevin Pietersen को MS Dhoni ने स्टंप आउट कर दिया, और विकेट 0वीं गेंद पर दर्ज हुआ।

4. इस तरह का आउट पहली बार किसने किया था?

भारतीय क्रिकेटर Vinoo Mankad ने सबसे पहले इस तरह का रन-आउट किया था, जिसके बाद इसे “मंकड़िंग” कहा जाने लगा।

5. क्या आधुनिक क्रिकेट में यह सामान्य माना जाता है?

हाँ, आज के प्रोफेशनल क्रिकेट में इसे स्मार्ट और नियमसम्मत रणनीति के रूप बल्लेबाज देखते हैं।

Verified Analyst
Akash Pachore

Akash Pachore

Founder & Lead Cricket Analyst | Stump Ki Baat

आकाश पाचोरे **Stump Ki Baat** के संस्थापक और एक अनुभवी क्रिकेट विश्लेषक हैं। वे आंकड़ों और मैच की रणनीतियों को गहराई से समझाने के लिए जाने जाते हैं। उनका लक्ष्य क्रिकेट प्रशंसकों तक सबसे सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है।

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